महाशिवरात्रि 2026: 300 साल बाद 8 शुभ संयोग — जानें पूजा-पाठ, चार पहर के शुभ मुहूर्त और विधि 🕉️🙏
February 12, 2026 — इस बार महाशिवरात्रि 2026 का पर्व 15 फरवरी 2026 (रविवार) को फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि में मनाया जाएगा, जो 16 फरवरी 2026 तक चलेगी। इस रात को भगवान शिव की पूजा-उपासना का अत्यंत शुभ और पवित्र समय माना जाता है।
🔱 क्या खास है इस शिवरात्रि में?
ज्योतिष के अनुसार इस वर्ष महाशिवरात्रि के समय आठ दुर्लभ और शुभ योग बन रहे हैं — ऐसा लगभग 300 साल बाद ही देखने को मिलता है। इन योगों के कारण भोलेनाथ की कृपा विशेष रूप से मिलने की मान्यता है।
🕰️ महाशिवरात्रि 2026 — पूजा-धार्मिक समय (भारत, IST)
| कार्यक्रम | तारीख व समय |
|---|---|
| चतुर्दशी तिथि प्रारंभ | 15 फ़रवरी 2026, 05:04 PM |
| चतुर्दशी तिथि समाप्त | 16 फ़रवरी 2026, 05:34 PM |
| पहला प्रहर पूजा | 15 फ़रवरी 06:11 PM – 09:23 PM |
| दूसरा प्रहर पूजा | 15 फ़रवरी 09:23 PM – 16 फ़रवरी 12:35 AM |
| तीसरा प्रहर पूजा | 16 फ़रवरी 12:35 AM – 03:47 AM |
| चौथा प्रहर पूजा | 16 फ़रवरी 03:47 AM – 06:59 AM |
| निशीथा काल (सबसे शुभ) | 16 फ़रवरी 12:09 AM – 01:01 AM |
| पारण (व्रत खोलना) | 16 फ़रवरी सुबह 06:59 AM – 03:24 PM |
✨ निशीथा काल को “निशीथ पूजा” कहा जाता है और इसे सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है क्योंकि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी समय भगवान शिव का सर्वाधिक आशीर्वाद मिलता है।

🪔 पूजा-विधि और श्रद्धा कर्म
इस रात भक्तजन शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद, पंचामृत तथा बेलपत्र चढ़ाते हैं। रात्रि जागरण करके “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप, रुद्राभिषेक, शिव स्तुति और भजन-कीर्तन करना शुभ फलदायक माना जाता है।
🧘 व्रत और संस्कृति
महाशिवरात्रि का व्रत केवल उपवास ही नहीं, बल्कि आत्म-शुद्धि, संयम और ध्यान का पर्व भी है। भक्तजन शाम से लेकर अगले दिन तक एकाग्र चित्त से पूजा-अर्चना कर स्वयं को शिवभक्ति के मार्ग पर समर्पित करते हैं।